Saturday, September 11, 2021

 Consius level पर ज्यादा वही

जी सकता है, जिसकी मन के लिए कोई मांग न हो..

क्यों की जब भी तुम कुछ न कुछ चाहोगे, तब तक दिमाग चलेगा......

और तुम्हे घुमा घुमा के मन में ले आयेगा



मैं बनता हूं उससे

जो मुझको बनाता है...


तो जो मैं हूं,

उसका मुझे अब खयाल रखना ही है


Friday, September 10, 2021

मरे जब मन

बचे न कोई रंग 

जी कर करे क्या ऐसा कोई अब

जो आया सब से तंग 

एक होता है सत्य को जानना

एक होता है सत्य को जीना

और एक होता है सत्य हो जाना


धन्य है वो 

जो स्वयं सत्य स्वरुप हो गए है


उनके प्रति सदा आकर्षण सा रहा मुझे 

पता नहीं क्यों

अनुभव के अर्क से

जीवन के दीपक को जलाना


पीड़ा की आंधीओ से 

उस दीपक को बुझने से बचाना 


खतम करने की, जब आ जाये जरूरत

स्वयं की मर्जी से, अपने हाथों से उसको बुझाना 

टूट गया वो 

मुझको तराशते तराशते...

में बेवकूफ  खुद को बदल न पाया,


था वो बेशकीमती सख्श मेरा

जिसको कभी संभाल न पाया


अब बदलने के अलावा

कोई option नही रहा मेरे पास


पर सवाल है ये की क्या 

होगा थोडासा यकीन भी उसको मेरे पास....??!?

 कीमती नहीं लगती मुझको मेरी ज़िंदगी 

कारण यही है गलतीओ का....


 तो अब बनाता हु खुद को कीमती

शायद उससे मेरे जोहरी की कीमत में इजाफा हो...

 सुधर तो जावूंगा में

लेकिन माफी चाहिए बस उसकी


केसे बतावु उसे ये बात

परवा है मुझे उसकी


शायद वक्त और मेरी बदलाहट

ही उस तक ये पैगाम पहोचाए....

 Consius level पर ज्यादा वही जी सकता है, जिसकी मन के लिए कोई मांग न हो.. क्यों की जब भी तुम कुछ न कुछ चाहोगे, तब तक दिमाग चलेगा...... और तुम...